Friday, 10 January 2014

प्रण - वो प्रतिज्ञा




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                                                   -----रजनीश शुक्ल
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कुछ कर गुजरना हो तुम्हे तो
आस दूजे से न करना
हो भरोसा खुद पे तो तुम
राह दूजे कि न तकना।

खुद से कर लो आज वादा
मैं न रुकूँ चल के राह आधा
पग पग भले हो लाख बाधा
या
किस्मत ने हो दुश्मनी का तीर साधा

लांग लूँ गा हर एक बाधा
दुश्मनो से दोस्ती करने का है
मेरा इरादा।

कुछ कर गुजरना है जो तुमको
तो भक्ति खुद कि शक्ति का करना
राह चलते मौत का हो खौफ
उससे भी न डरना
डगमगाते हों कदम तो
कदमो को भी, तुम थाम लेना।

कर सको इतना जो बन्दे,
पाओगे जो तुमने है ठाना।
                                             by,
                                            -----रजनीश शुक्ल









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