Friday, 18 December 2015

chor kar aaj hum gaon khud ka (by Rajneesh Shukla)

छोड़ कर आज,
हम गांंव खुद का,
शहरों में अपनों को खोजने लगे
बसती थी,
जिन गलियों में हमारे लिए ममता,
उनसे ही मुह मोड़ कर, आज हम 
अनजान सड़कों से मोहब्बत करने लगे...

यहाँ ठोकर भी खता हूँ,
और कभी गिर भी जाता हूँ ,
पर 
आज संभालता नहीं कोई मुझे,
फिर भी
छोड़ कर आज, 
हम गांंव खुद का,
शहरों में 
जिल्लत व दर्दे सितम सहते हैं

                                          ---  रजनीश शुक्ल 

Other Poems:

No comments:

Post a Comment